September 26, 2021

अवैध कब्जे रोकने में जीपीएस होगा लेखपालों का विकल्प


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विस्तारित क्षेत्र में आए 88 गांवों को मिलाकर नगर निगम सीमा में 212 गांव हो गए हैं। यहां करीब 16 हजार बीघा सरकारी जमीन है, जिसमें से करीब दो हजार बीघे पर अवैध कब्जे हैं। मगर लेखपालों की कमी की वजह से नगर निगम ये कब्जे रोक पाने में नाकाम रहा है। ऐसे में अब नगर निगम विस्तारित क्षेत्र की जमीनों का जीपीएस सर्वे कराएगा ताकि इनका डिजिटल रिकॉर्ड बनाने के साथ ही अवैध कब्जे में फंसी जमीनों का भी पता लगाया जा सके।
राजस्व विभाग से प्रतिनियुक्ति पर लेखपालों के न आने से जमीन की जांच और सुरक्षा का काम नहीं हो पा रहा है। नगर निगम को कम से कम 25 लेखपालों की जरूरत है, मगर हैं सिर्फ दो। नगर निगम ने करीब तीन माह पहले राजस्व विभाग से 25 लेखापाल और दो कानूनगो मांगे थे, मगर ये अब तक मिले नहीं हैं। विभाग ने नगर निगम को संविदा लेखपाल रखने की सलाह दी है।
लेखपाल लौटकर ही नहीं आए
सीमा विस्तार के बाद बीते साल जिला प्रशासन की ओर से लेखपाल मृदुल मिश्रा, कुंवर प्रशांत सिंह को नगर निगम से अटैच किया गया था। जिन्हें सर्वे कर यह रिपोर्ट बनानी थी कि कितनी जमीन पर कब्जा है और कितनी खाली है। ये लेखपाल कुछ दिन तो नगर निगम आए, मगर सर्वे कर कोई पुख्ता रिपोर्ट नहीं दी और कुछ दिन बाद आना ही बंद कर दिया। नगर आयुक्त ने डीएम को पत्र भी लिखा, मगर वे दोबारा नहीं आए। करीब 1200 बीघा अवैध कब्जे पुराने 124 गावों की जमीन पर हैं। वहीं जो नए गांव शामिल हुए हैं, वहां जमीनों पर अवैध कब्जे का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। मगर माना जा रहा है कि करीब 800 बीघा जमीन पर अवैध कब्जे हैं।
जीपीएस सिस्टम के जरिए विस्तारित क्षेत्र की जमीनों का सर्वे कराया जाएगा। इससे डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार हो जाएगा। लेखपालों की तैनाती के लिए भी राजस्व परिषद से दोबारा मांग की गई है।
– अभय पांडेय, अपर नगर आयुक्त

विस्तारित क्षेत्र में आए 88 गांवों को मिलाकर नगर निगम सीमा में 212 गांव हो गए हैं। यहां करीब 16 हजार बीघा सरकारी जमीन है, जिसमें से करीब दो हजार बीघे पर अवैध कब्जे हैं। मगर लेखपालों की कमी की वजह से नगर निगम ये कब्जे रोक पाने में नाकाम रहा है। ऐसे में अब नगर निगम विस्तारित क्षेत्र की जमीनों का जीपीएस सर्वे कराएगा ताकि इनका डिजिटल रिकॉर्ड बनाने के साथ ही अवैध कब्जे में फंसी जमीनों का भी पता लगाया जा सके।

राजस्व विभाग से प्रतिनियुक्ति पर लेखपालों के न आने से जमीन की जांच और सुरक्षा का काम नहीं हो पा रहा है। नगर निगम को कम से कम 25 लेखपालों की जरूरत है, मगर हैं सिर्फ दो। नगर निगम ने करीब तीन माह पहले राजस्व विभाग से 25 लेखापाल और दो कानूनगो मांगे थे, मगर ये अब तक मिले नहीं हैं। विभाग ने नगर निगम को संविदा लेखपाल रखने की सलाह दी है।

लेखपाल लौटकर ही नहीं आए

सीमा विस्तार के बाद बीते साल जिला प्रशासन की ओर से लेखपाल मृदुल मिश्रा, कुंवर प्रशांत सिंह को नगर निगम से अटैच किया गया था। जिन्हें सर्वे कर यह रिपोर्ट बनानी थी कि कितनी जमीन पर कब्जा है और कितनी खाली है। ये लेखपाल कुछ दिन तो नगर निगम आए, मगर सर्वे कर कोई पुख्ता रिपोर्ट नहीं दी और कुछ दिन बाद आना ही बंद कर दिया। नगर आयुक्त ने डीएम को पत्र भी लिखा, मगर वे दोबारा नहीं आए। करीब 1200 बीघा अवैध कब्जे पुराने 124 गावों की जमीन पर हैं। वहीं जो नए गांव शामिल हुए हैं, वहां जमीनों पर अवैध कब्जे का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। मगर माना जा रहा है कि करीब 800 बीघा जमीन पर अवैध कब्जे हैं।

जीपीएस सिस्टम के जरिए विस्तारित क्षेत्र की जमीनों का सर्वे कराया जाएगा। इससे डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार हो जाएगा। लेखपालों की तैनाती के लिए भी राजस्व परिषद से दोबारा मांग की गई है।

– अभय पांडेय, अपर नगर आयुक्त



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